राजनीति

Bankipur By-Election: क्या Samrat Choudhary की ये 7 बड़ी गलतियां BJP की हार की वजह बनीं?

: जब बांकीपुर उपचुनाव नतीजे वो केवल एक सीट के नतीजे नहीं थीं बल्कि कि बिहार के भविष्य राजनीति का ट्रेलर था। सियासत में कोई भी चुनाव केवल एक कारण से नहीं हारता। Public Sentiment, Governance, Leadership, Organization, Candidate Selection, Voter Turnout और Election Narrative—ये सभी मिलकर परिणाम डिसाइड करती है।

 

Bankipur By-Election
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आइए उन प्रमुख वजहों को समझते हैं, जिनकी चर्चा राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा हो रही है।

 

  1. Police Action vs Public Perception

 

किसी भी सरकार का पहला दायित्व Law & Order बनाए रखना होता है। लेकिन जब जनता के एक वर्ग को यह महसूस होने लगे कि पुलिस का इस्तेमाल सुरक्षा से ज्यादा विरोध प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए हो रहा है, या फिर जनता दबाने और डराने के लिए हो रहा है तो Public Perception बदलने लगता है।

 

चुनाव में अक्सर वास्तविकता से अधिक Perception काम करता है। यदि मतदाता यह मान लें कि सरकार संवाद (Dialogue) की बजाय प्रशासनिक सख्ती (Administrative Action) पर अधिक भरोसा कर रही है, तो उसका राजनीतिक असर पड़ सकता है।

 

  1. Bharat Tiwari Case पर Political Silence

 

भरत तिवारी मामले को जिस तरह से तिवारी के सरेंडर करने के बाद भी पुलिस उसे गोली से मार दिया वो किसी भी सभ्य समाज स्वीकार नहीं किया वो तब जब आज सोशल मीडिया दौर आ चुका जहां हर चीज रिकार्ड होता है। जो भरत तिवारी समाज के आम लोगों के लिए जुड़े विषय उठाता उस तिवारी का फेक एनकाउंटर मरना बिहार के अपर कास्ट वोटरों मन में ही सवाल खड़ा नहीं किया बल्कि हर वर्ग में नाराजगी पैदा होने लगा जिसका असर उपचुनाव नतीजे जरीए दिख गया है। जब चुनाव निकट आई तो सरकार इस मामले में भरत तिवारी परिवार से मिलती लेकिन तब तक शायद बहुत देर हो चुकी और इस मामले नाराजगी जनता की पुलिस बढ़कर  मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी तक पहुंच गया। राजनीति में कई बार Silence is also a Message माना जाता है। यदि किसी संवेदनशील मामले पर सरकार की प्रतिक्रिया कमजोर दिखाई देती है, तो विपक्ष उसे Narrative में बदल देता है।

 

  1. NEET Student Case और Patna Incidents

 

हाल के महीनों में छात्रों और महिलाओं से जुड़े घटनाएं ऐसी जिस में सरकार ने मजबूती से एक्शन नहीं लिया। सरकार कहतीं थी कि अपराधी छोड़ेंगे वही सरकार लगातार हो रहें महिलाओं अपराध खामोश हो गई।सरकार ने कार्रवाई की बात कही, लेकिन विपक्ष का आरोप था कि Strong Political Message और Visible Action की कमी रही। चुनाव में जनता सिर्फ कार्रवाई नहीं, बल्कि नेतृत्व का स्पष्ट रुख भी देखती है।

 

  1. 7% Lower Voter Turnout

 

इस चुनाव में एक बात देखने को मिली भाजपा कार्यकर्ताओं उत्साह बिल्कुल नहीं था। वजह साफ थी इस समय बिहार बीजेपी दो भागों बंटी हुई है एक सम्राट चौधरी के पक्ष और दुसरा सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री के रुप नहीं देखने चाहता है। भाजपा कार्यकर्ताओं एक बड़ा वर्ग केंद्रीय नेतृत्व उस फैसले ख़फ़ा था जिसमें सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाया गया था।  शायद इस उपचुनाव का सबसे महत्वपूर्ण आंकड़ा लगभग 7 प्रतिशत कम Voting रहा।कम मतदान का मतलब हमेशा सत्ता विरोधी लहर नहीं होता, लेकिन यह संकेत जरूर देता है कि किसी दल का Core Voter पूरी संख्या में मतदान केंद्र तक नहीं पहुंचा।यदि समर्थक घर से बाहर ही नहीं निकले, तो मजबूत संगठन भी चुनाव हार सकता है।

 

  1. Bihar Student Movement

 

हाल दिनों में Gen z आंदोलन बिहार के सियासत प्रभावित किया और बांकीपुर उपचुनाव वहां पर करीब 1 लाख 20 -35 हजार तक Gen z वोटर हैं। बिहार में छात्र आंदोलन कोई नया विषय नहीं है। रोजगार, भर्ती परीक्षाएं, पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था और युवाओं की नाराज़गी चुनावी माहौल को प्रभावित करती है। Youth Sentiment किसी भी चुनाव में बड़ा Factor बन सकता है।

 

  1. Overconfidence

 

राजनीति में Overconfidence कई बार सबसे बड़ी कमजोरी बन जाता है। असल मायने भाजपा ऐसा लग रहा था कि 31 साल क़िला में कोई बीजेपी नही हरा सकता है। चाहे वो किसी कुत्ता बिलाई या किसी को भी टिकट यही भाजपा की सबसे बड़ी ग़लती थी। जब कोई दल यह मान ले कि सीट सुरक्षित है, तब Booth Management, Ground Campaign, Worker Mobilization और Door-to-Door Connect कमजोर पड़ जाता है।

 

बांकीपुर के नतीजे प्रशांत किशोर के उम्मीदो के लिए नई रोशनी काम करेगा वहीं इस चुनावी नतीजें से सम्राट चौधरी को ये सिख लेना चाहिए कि वो जनता के सेवक है ना कि मालिक पुलिस का प्रयोग जनता के सुरक्षा के लिए करना ना कि डर माहोल बनाने के लिए।‌

 

हालांकि भाजपा वो पार्टी जो जीत के बाद ना तो ज्यादा उत्साह में होता ना ही ज्यादा देर निराशा के भावनाओं में जीता बल्कि कि भाजपा फौरन अपनी गलतियों को खोजता उन गलतियां कमियों दुर करने के लिए हर संभव कोशिश करता है और जरूरत पड़ने पर किसी सीएम या फिर पुरे कैबिनेट बदलने एक पल भी नहीं सोचती है यही भाजपा का राजनीति तरीका है।

Shashikant kumar

शशिकांत कुमार युवा लेखक राजनीति, 2024 की रणभूमि पुस्तक के लेखक। पिछले कई चुनावों से लगातार ही सबसे विश्वसनीय विश्लेषक।।।

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