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डोनाल्ड ट्रंप ने दूसरी बार पेरिस जलवायु समझौते से अमेरिका को बाहर किया

पेरिस जलवायु

पेरिस जलवायु समझौता क्या है? 2015 में पेरिस जलवायु समझौता बनाया गया, जिसका उद्देश्य था कि दुनिया का तापमान औद्योगिक युग से पहले के मुकाबले 2°C से नीचे रखा जाए और कोशिश की जाए कि यह 1.5°C तक सीमित हो। इस समझौते में हर देश को अपने-अपने उत्सर्जन कटौती (NDCs) के लक्ष्य तय करने और उसे हासिल करने की जिम्मेदारी दी गई।

पेरिस जलवायु
पेरिस जलवायु

ट्रंप की पहली वापसी (2017):

2017 में अपने पहले कार्यकाल के दौरान, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पेरिस समझौते से अमेरिका को बाहर कर दिया था। उन्होंने कहा था कि यह समझौता अमेरिका के लिए अनुचित है और इससे देश की अर्थव्यवस्था और उद्योगों को नुकसान हो रहा है। इस फैसले की दुनियाभर में आलोचना हुई और अमेरिका की भूमिका पर सवाल उठे।

बाइडेन का समझौते में फिर से जुड़ना (2021):

2021 में राष्ट्रपति जो बाइडेन ने ट्रंप के इस फैसले को पलटते हुए अमेरिका को पेरिस समझौते में फिर से शामिल किया। उन्होंने 2035 तक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 60% से अधिक कटौती करने का बड़ा लक्ष्य रखा।

ट्रंप की दूसरी वापसी (2025):

20 जनवरी 2025 को, अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका को पेरिस समझौते से दूसरी बार बाहर निकालने का आदेश दिया। अपने उद्घाटन समारोह के दौरान, उन्होंने कहा, “यह समझौता अमेरिका के साथ अन्याय कर रहा है। हम इस अनुचित और एकतरफा समझौते से तुरंत हट रहे हैं।”

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ट्रंप ने चीन को इसका जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि चीन बड़े पैमाने पर प्रदूषण कर रहा है, जबकि अमेरिका के उद्योगों पर सख्त नियम लगाए जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि चीन की गंदी ऊर्जा से निकलने वाला प्रदूषण हवा के जरिए अमेरिका तक पहुंचता है।

समारोह और आदेश:

इस बार उद्घाटन समारोह यूएस कैपिटल के अंदर हुआ, जबकि आमतौर पर यह बाहर होता है। जो लोग समारोह को देखना चाहते थे, उन्हें स्पोर्टिंग एरिना में ले जाया गया, जहां विशाल स्क्रीन पर कार्यक्रम दिखाया गया।

ट्रंप ने समारोह के बाद तुरंत काम शुरू करते हुए एक आदेश पर हस्ताक्षर किए, जिसमें उन्होंने बाइडेन प्रशासन के समय बनाए गए 78 नियमों और आदेशों को रद्द कर दिया। यह आदेश स्पोर्टिंग एरिना में उनके समर्थकों के सामने दिया गया।

वैश्विक प्रतिक्रिया और प्रभाव:

ट्रंप के इस फैसले से दुनियाभर में चिंता बढ़ गई है। यूरोपीय संघ ने पेरिस समझौते के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई, जबकि संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि इस फैसले से जलवायु परिवर्तन से लड़ने के प्रयास कमजोर हो सकते हैं।

अमेरिका, जो दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जक है, का यह कदम वैश्विक तापमान बढ़ाने और जलवायु संबंधी समस्याओं को बढ़ाने का कारण बन सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला अन्य देशों को भी अपने पर्यावरणीय लक्ष्यों में कमी करने के लिए प्रेरित कर सकता है।

इस प्रकार, डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल में पेरिस जलवायु समझौते से अमेरिका को दोबारा बाहर कर दिया है, जिससे वैश्विक जलवायु प्रयासों पर बड़ा असर पड़ सकता है।

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