Assembly Elections 2023 : पांच राज्यों के विधानसभा (Assembly Elections 2023) चुनाव संपन्न हो गया अब बारी विभिन्न एक्जिट पोल का है। लेकिन जैसा कि आप जानते हैं कि इंड टॉक का अनुमान पिछले कई सालों सबसे विश्वसनीय रहा है, आइए जानते हैं कि पांच राज्यों में किसकी सरकार बने जा रही है। इस पांच राज्यों के चुनाव में भाषा का मर्यादा गिरी है और इस चुनाव को आप सियासत का सेमीफाइनल भी कह सकते हैं क्योंकि इसके बाद अब लोकसभा चुनाव की बारी है। लोकसभा चुनाव से पहले इस चुनाव का महत्व काफी बढ़ जाता है।

मिजोरम में किसकी
मिजोरम में किसकी सरकार बन रहीं हैं जैसा कि नार्थ ईस्ट बीजेपी तेज़ी आगे बढ़ रही थी लेकिन मणिपुर के घटना के बाद से नार्थ ईस्ट की सियासत की परिस्थिति पलट गई है,मिजोरम में बीजेपी उतना मजबूत नहीं है इसलिए बीजेपी ने यहां पर सरकार बनाने के लिए चुनाव नहीं लड़ी बल्कि कि किंग मेकर बनें के लिए लड़ी।इस बार मिजोरम में कुल वोट प्रतिशत 77.04% रहा है जो कि पिछले बार से करीब दो प्रतिशत ज्यादा है, जब भी वोट प्रतिशत बढ़ती तो ऐसा कहा जाता है कि सत्ता के विरूद्ध लहर चल रहा या फिर किसी एक पार्टी पक्ष में हवा चल रहा है, इस समय अगर मिज़ोरम के परिस्थितियों देखें तो यहां पर जो दल सत्ता में वहीं वापस आ रही है। आगे हम सीटों में हमारा अनुमान बताएंगे लेकिन इस पुर्व में आपको स्पष्ट बता दें कि ये बस अनुमान नतीजें तो 3 दिसंबर को आएगा।
मिज़ोरम में इस बार के वोट प्रतिशत के बात करें तो सत्तारुढ़ दल MNF की वोट प्रतिशत में थोड़ा उछाल देखा जा सकता है जहां पिछले एमएनएफएफ को 37 प्रतिशत क़रीब वोट मिला था वहीं इस बार आंकड़ा क़रीब 38 से 40 प्रतिशत के आस-पास पहुंचेगा। वहीं बीजेपी के वोट शेयर एक प्रतिशत आस-पास बढ़ने के संभावना है बाकी कांग्रेस की वोट प्रतिशत भी बढ़ने के संभावना है लेकिन इस बात पर जरूर गौर करें कि बीजेपी का अप्रत्यक्ष तौर मिजोरम MNF के साथ गठबंधन है इसलिए बीजेपी कम सीटों पर चुनाव लड़ रहीं हैं।
मिज़ोरम 40 सीटों का अनुमान
MNF | 18 से 23 |
BJP | 0 से 4 |
Congress | 5 से 12 |
Other | 8 से 15 |
छत्तीसगढ़ में किसकी सरकार
छत्तीसगढ़ वो राज्य जहां पर लंबे समय तक बीजेपी ने सरकार चलाया लेकिन पिछले चुनाव में यहां कांग्रेस के सरकार बन गई। जिसके बाद से ही बीजेपी लगातार ही छत्तीसगढ़ में सरकार बनाने के प्रयास कर रहीं हैं। छत्तीसगढ़ में जो गलतियां बीजेपी ने पिछली बार किया वो गलतियां इस बार दुबारा बीजेपी ने नहीं किया।
पिछले बार बीजेपी सरकार जानें के प्रमुख कारण
पहला कारण??
जैसे कि डॉ रमण सिंह विरुद्ध पिछले चुनाव में आदिवासी समाज में गहरा नाराजगी था। यहीं कारण था कि बीजेपी पिछ्ला चुनाव हार गई थी।असल में 2018 में रमन सिंह के शासन काल के दौरान सलमा जडुम कार्यक्रम था जिसे लेकर आदिवासी समाज में गहरा नाराजगी थी,बाद में कोर्ट ने रोक लगा दिया था लेकिन इस बार सीएम का चेहरा रमन सिंह के नहीं होने कारण हो सकता है कि आदिवासी समाज का नाराजगी दुर हो जाएं।
दुसरा कारण
दुसरा कारण था कि ओबीसी समाज एक बड़ा वर्ग बीजेपी जगह कांग्रेस वोट किया उसी का नतीजा रहा कि 2018 कांग्रेस सरकार बन गई असल कहानी छत्तीसगढ़ में ओबीसी और आदिवासी वोटर महत्वपूर्ण भुमिका रहते हैं। ये वो कारण रहें जिस वज़ह से रमन सिंह के सत्ता चली गई थी।
2018 में कांग्रेस के में सत्ता आने के बाद लगातार ही छत्तीसगढ़ के सियासत में विभिन्न मुद्दे हावी रहे लेकिन अब एक बार फिर से यहीं लग रहा है कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार लोट रहीं हैं, संभावना ज्यादा नज़र आ रहीं हैं कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार बन जाएगी। वैसे राजनीति में कब खेल बदल जाएं ये कोई नहीं जानता है लेकि मेरा अनुमान कहता है कि इस बार छत्तीसगढ़ कांग्रेस सरकार बन जाएगी। सीटें और आंकड़े आपको आगे बताएंगे लेकिन उस पुर्व में आपको ये बता दें कि छत्तीसगढ़ के मौजूदा मुख्यमंत्री भुवेश बघेल ने दावा किया है कि इस बार छत्तीसगढ़ में बीजेपी 15 सीटों पर सिमट जाएगा।
2023 छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव पर अनुमान
2023 में छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव हमारा अनुमान कहता है कि इस बार कांग्रेस सरकार बन रहीं हैं। कांग्रेस का वोट शेयर पिछले चुनाव से बढ़ने वाला लेकिन ज्यादा नहीं बढ़ेगा।बस एक या दो प्रतिशत बढ़त देखने मिल सकता। वहीं बीजेपी के बात करें तो इस बार पिछले चुनाव से ज्यादा सीटें मिलते दिख रहें हैं।
कांग्रेस | 45 से 60 |
भाजपा | 20 से 30 |
Other | 10 से 15 |
एक बार फिर से स्पष्ट कर देना चाहते कि ये बस अनुमान है असली आंकड़े 3 दिसंबर को आएगा।
मध्यप्रदेश में किसका सरकार??
मध्यप्रदेश में इस बार किसका सरकार बने जा रहा है, जैसा कि आप जानते हैं कि इस बार एमपी वो सारे मुद्दे हावी नहीं रहें जो कि 2018 में बीजेपी हार प्रमुख कारण बने जैसे कि किसानों, सर्वण वोटर भी मोदी सरकार के SC/ST एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट फ़ैसले को पलटनें से नाराज़ इस बार ऐसा कोई तस्वीर देखने को नहीं मिलेगा। एमपी में इस बार ऐसा लग रहा है कि बीजेपी सरकार बचाने में कामयाब रहीं लेकिन इस बार भी एमपी में कांटे टक्कर देखने मिलेगा।35 से 40 ऐसे सीट जहां पर कांग्रेस -बीजेपी के हार या जीत में ज्यादा वोटरों का अंतर नहीं है, वैसे ऐसे सीटों की संख्या बढ़ भी सकती है क्योंकि मध्यप्रदेश जो बातें सामने आ रही उसे मानें तो इस बार कांग्रेस – बीजेपी दोनों के बीच कांटे टक्कर देखने को मिलेगा।
इस बार एमपी में चुनावी मुद्दे पिछली बार तरह नहीं था, बल्कि कि इस बार का मुद्दा बदला हुआ था। इस बार सर्वण समाज के वोटरों में भी बीजेपी के प्रति वो नाराजगी नहीं था,इस बार लाडली बहना योजना का असर भी देखने मिला है, यूं कहिए कि इस चुनाव फ्री स्कीमें ज्यादा चर्चा में रहा है। जिसकी दिल्ली में केजरीवाल ने किया था लेकिन अब वो फ्री स्कीमें को देश भर राजनीति दल अपनाने लगा जिसका नुकसान आज नहीं कल देश को चुकाना पड़ेगा।
इस बार मध्यप्रदेश के चुनाव में कांग्रेस तरफ़ से नारी शक्ति वंदन विधेयक में ओबीसी महिलाओं को आरक्षण देने की मुद्रा उठाएं था लेकिन वो उतना नहीं चल पाए हैं इसी तरह भाजपा का हिन्दुत्व का मुद्दा भी मध्यप्रदेश में उतना नहीं चला है। इस बार मध्यप्रदेश सियासी गणित बिल्कुल उलट देखने को मिलेगा जो दावे दोनों दलों तरफ़ से किए गये उस से विपरीत परिस्थिति ग्राउंड देखने को मिलेगा।
मध्यप्रदेश का माहौल
मध्यप्रदेश में जिस प्रकार का चुनावी माहौल उससे यही लग रहा है कि इस बार मध्यप्रदेश में सीटों आंकलन करना काफी कठिन है, क्योंकि यहां पर हर सीट का अलग ही कहानी यहां पर कांग्रेस -बीजेपी के बीच कांटे टक्कर देखने को मिल रहा है। कुछ सीट ऐसे भी जहां पर बीजेपी-कांग्रेस के बाग़ी उम्मीदवार मुश्किलें खड़े कर रहे तो कई सीटें ऐसे जहां पर निर्दलीय या क्षेत्रीय दल के उम्मीदवार भी मुश्किलें खड़े कर रहे हैं। यूं कहिए इन उम्मीदवारों ने भी मध्यप्रदेश चुनाव को रोमांचक बनाएं अब हम आपको सीटों में आंकलन बता देते हैं लेकिन उस पहले आपको वोट प्रतिशत का बताते हैं ।
वोट प्रतिशत
इस बार मध्यप्रदेश में बीजेपी के वोट शेयर पिछली बार से बढ़ेगी। पिछले बार भाजपा सरकार बनाने स्थिति में नहीं तब भी 41 प्रतिशत वोट शेयर हासिल किया जबकि कांग्रेस पार्टी 40 प्रतिशत तक ही था लेकिन इस बार बीजेपी का वोट शेयर 42 से 45 के बीच रहेगा जबकि कांग्रेस का 37 से 41 प्रतिशत रहेगा।
सीटों का आंकलन
कांग्रेस | 103-113 |
बीजेपी | 108-116 |
अन्य | 8-11 |
राजस्थान में इस बार किसका सरकार??
राजस्थान वो राज्य जहां पर हर पांच साल में सत्ता बदलने का रिवाज है,लेकिन इस बार क्या यहीं होने वाला राजस्थान में। सियासत के जादूगर अशोक गहलोत ने लगातार दावे कर रहे हैं कि इस बार इतिहास बदलने वाला है और इस बार कांग्रेस की सरकार सत्ता वापस आने ही वाली है। लेकिन जो राजस्थान में वोटिंग पैटन दिखा उस यहीं लग रहा है कि बीजेपी सरकार बना लेगी यानी राजस्थान में जो पिछले 30 सालों हो रहा है हर पांच साल में यहां सरकार बदल जातीं वो इस बार भी क़ायम रहा।
धरातल पर ये दिखा है कि अशोक गहलोत कई योजनाओ को जनता पसंद कर रहे हैं लेकिन स्थानीय विधायक और कई मंत्रियों से जनता नाराज हैं। सचिन और गहलोत लड़ाई भी कांग्रेस को नुकसान पहुंचा रहा इसके अलावा बीजेपी ने राजस्थान में धुव्रीकरण के सियासत को खुब किया जो कि वो छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश नहीं कर पाईं। जिस प्रकार से हिन्दुत्व मुद्दे पर कमलनाथ खुलकर अपने बात रखें और हिंदुत्व मुद्दे पर बीजेपी को पिछे किया वहीं गहलोत नहीं कर पाएं।
वोट प्रतिशत
वोट प्रतिशत की बात करें तो पिछले बार से ज्यादा इस बार बढ़ने की संभावना है। पिछले भी बीजेपी वोट शेयर ज्यादा था लेकिन सीटें कम थी इस बार भी बीजेपी का वोट शेयर कांग्रेस से अधिक रहेगा हमारा अनुमान वोट शेयर के अनुसार भाजपा 42-45 प्रतिशत है जबकि कांग्रेस का 37 से 39 प्रतिशत रहेगा। अब सीटों देखते क्या परिस्थिति रहेगा।
सीटों आंकलन
बीजेपी | 110 से 130 |
कांग्रेस | 60 से 75 |
अन्य | 10 से 15 |
तेलंगाना में किसकी सरकार?
तेलंगाना के राजनीति परिस्थिति को जब हम देख रहे हैं वैसा लग रहा है कि वहां पर इस बार बीआरएस सरकार बचाने में कामयाब रहेंगी लेकिन इस बार कांग्रेस बीआरएस को कांटे टक्कर देगा। पिछली बार तरह बड़ी जीत बीआरएस इस बार हासिल नहीं करेंगा बल्कि कि बीआरएस सीटों संख्या कम हो जाएगा।
कुछ चुनावी विश्लेषको ये दावा किया था कि कांग्रेस सरकार तेलंगाना में बन रही है लेकिन वैसा परिस्थिति इस बार नहीं है, बीजेपी ने भी यहीं दावा किया था कि तेलंगाना में बीजेपी सरकार बन रहीं हैं लेकिन बीजेपी यहां बस वोट शेयर और कुछ सीटों को बढ़ाकर सकती हैं। इस बार तेलंगाना में बीजेपी के सरकार बन रहीं हैं।
सीटों का आंकड़ा
बीआरएस | 50-68 |
कांग्रेस | 35 -49 |
बीजेपी | 2-8 |
अन्य | 10-17 |
ये बस चुनावी अनुमान है फाइनल फैसला 3 दिसंबर को ही आएगा। तबतक के लिए इंतजार करना पड़ेगा।